वेद स्वाध्याय में आचार्यश्री डॉ. संजयदेव के विचार

इन्दौर- 31 मई 2009, भारतीय संस्कृति के प्रखर चिन्तक वेदमर्मज्ञ आचार्यश्री डॉ. संजयदेव ने कहा है कि "केवल बातें बनाने से किसी का उद्धार नहीं होता। परिश्रम और पुरुषार्थ पूर्वक अपने कर्त्तव्य का पालन करने वाला व्यक्ति ही जीवन में सफल होता है। पुरुषार्थी व्यक्ति समय और साधन की प्रतीक्षा नहीं करता। पुुरुषार्थी व्यक्ति के लिए प्रत्येक दिन शुभ होता है।'' आचार्यश्री ने दिव्य मानव मिशन द्वारा बैक कालोनी में आयोजित वेद स्वाध्याय के अवसर पर यह विचार प्रकट किये। आचार्यश्री ने वेद का सन्देश सुनाते हुए कहा कि ""जो लोग कल पर किसी कार्य को टालते हैं वे अपने ही साथ विश्वासघात करते हैं। वेद में किसी भी शुभ कार्य को कल पर टालने का निषेध किया गया है। किसी भी कार्य को प्रारंभ करना ही पर्याप्त नहीं है, अपितु सच्चा मनुष्य वही है जो प्रारंभ किए हुए कार्य को पूरा करके ही रहता है। शुभ कार्यों में कठिनाइयॉं तो आती ही हैं। कठिनाइयों और बाधाओं की परवाह न करते हुए अपने कार्य में संलग्न रहने वाला व्यक्ति अपने उद्देश्य को निश्चित रूप से प्राप्त करता है।''

आचार्यश्री ने आगे कहा कि "संसार में तीन तरह के लोग होते हैं। जो लोग कठिनाइयों और बाधाओं के भय से शुभ कार्य को आरम्भ ही नहीं करते, वे निम्न कोटि के होते हैं। मध्यम कोटि के लोग वे होते हैं जो कार्य को आरम्भ तो कर देते हैं परन्तु कठिनाइयों और बाधाओं के आने पर कार्य को बीच में ही छोड़ देते हैं। बारम्बार विघ्न और बाधाएं उपस्थित होने पर भी जो अपने कार्य में लगे रहते हैं वे ही सबसे उत्तम कोटि के लोग होते हैं।''

इस अवसर पर श्री सत्यपाल शास्त्री के सुमधुर भजन हुए। श्री सतीश नरवरिया ने आचार्यश्री का स्वागत किया तथा आभार प्रकट किया। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

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