यकृत विकार

 1. मूली एवं पत्तों का स्वरस एक कप प्रातः-सायं पानी से लेने से यकृत शोथ शीघ्र ठीक होता है। मूली एवं पत्तों का साग लगातार सेवन करने से यकृत शोथ दूर होता है। प्रातः कड़वी मूली का प्रयोग करना चाहिए। सूखी मूली का भूष (सूप) पीने से यकृत की पुरानी शोथ दूर होती है। मूली का क्षार एक ग्राम दोनों समय भोजनोपरान्त लेने से यकृत शोथ ठीक होता है।

2.  नीम की छाल के रस में शहद मिलाकर सुबह सेवन करने से कामला (पीलिया) में आराम मिलता है। तुलसी की पत्तियों का रस 10 ग्राम, मूली का रस 40 ग्राम मिलाकर गुड़ के साथ पिलाने से पीलिया रोग दूर हो जाता है।

अपच

1.  पेट में अजीर्ण या अपच होने पर अजवाइन, सौंठ, हरड़, सेंधा नमक समभाग लेकर चूर्ण बनाकर रखें। एक-एक चम्मच सुबह-दोपहर-रात पानी से लें।

 2.  संतरे की छिली हुई फांकों पर महीन पिसी हुई सोंठ तथा काला नमक छिड़कर खाने से एक सप्ताह के भीतर ही अपच की बीमारी दूर हो जाती हैतथा भूख खूब लगती है। मूली छीलकर बारीक काटकर यथारुचि सेंधा नमक और नींबू का रस डालकर भोजन के बाद सेवन करने से अजीर्ण में लाभप्रद है।

3.  पेट में अपच होने पर ताजी छाछ एक गिलास यथारुचि सेंधा नमक और भुना जीरा डालकर भोजन के साथ लें। साभार - निरामय जीवन

लेखक- डॉ. हनुमानप्रसाद  उत्तम    जनवरी 2009  (Divya Yug 2009)

 

 

 

 

 

 

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